जीवन में बड़ा जोखिम और अभूतपूर्व सफलता
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Category:
Failure & Resilience
Lesson:
"नो रिस्क, नो गेन" — जीवन में जब आप पूरी ईमानदारी और समझदारी के साथ बड़ा जोखिम उठाते हैं, तो ईश्वर सफलता के नए मार्ग खोल देता है।
Why it matters:
मैं एक्चुअली चार्टर्ड अकाउंटेंट बहुत स्ट्रगलिंग परिस्थिति में किया था। तो मैं अपना प्रैक्टिस 84 में स्टार्ट किया और मेरा मेन टर्निंग पॉइंट मेरे ऑफिस का 2004 में आया। 2004 में हमारी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की गाइडलाइंस आई थी मर्जर की। कि मर्जर आप किसी फर्म के साथ करते हो तो आपको इमीडिएटली प्वाइंट्स मिलते हैं। तो मैंने एक्चुअली तकदीर से भगवान की दया से मैंने एक फर्म को पाया कोलकाता में जो कि 1952 से वो कंटीन्यूअसली पार्टनरशिप फर्म थी। तो उसमें क्या है कि मेरे को काफी पैसा लगाना पड़ रहा था बिकॉज़ उनको कुछ पार्टनर फर्म को पैसा भी देना था इयरली अर्निंग्स भी देनी थी। मेरे पास इतनी सेविंग्स थी नहीं मतलब जितना सेविंग्स था मैंने पूरा रिस्क लगा दिया उसके ऊपर। मैं अपनी बेटी मेरी 17-18 साल की थी मैं उसके साथ शेयर किया कि बेटी देख मैं बहुत बड़ा लाइफ का रिस्क ले रहा हूं। मैं यदि इस फर्म को लेता हूं अपने साथ मर्जर करता हूं तो मेरी फर्म बहुत पुरानी हो जाएगी। मगर नहीं होता है कुछ फायदा नहीं होता है कुछ नहीं होता है तो मैं पूरा बर्बाद हो जाऊंगा। तो फिर भी बहुत मुश्किल होगा पर मैं रिस्क लिया। और लेने के बाद मर्जर करने के बाद 8-10 महीना के अंदर मेरे को बहुत दो बड़ी-बड़ी ऑडिट मिल गई। एक तो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का मैं ऑडिटर बन गया और दूसरा मैं यूनियन बैंक का भी सेंट्रल ऑडिटर बन गया। तो उससे क्या है कि मेरी फर्म वहीं से स्पीड पकड़ना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे आहिस्ते-आहिस्ते उड़ीसा से फिर मैं बॉम्बे शिफ्ट किया मेरा हेड ऑफिस को। और अब भगवान की दया से आज काफी गवर्नमेंट रिलेटेड असाइनमेंट्स, विभिन्न प्राइवेट असाइनमेंट भी अब काफी है। तो मेरी फर्म आज इस जिस लेवल में है उसका टर्निंग पॉइंट जो है वो 2004 रहा जब मैंने बहुत बड़ा रिस्क लिया। तो इसमें मैं यह बोलना चाहूंगा द मोरल इस दैट कि नो रिस्क नो गेन जो बोलते हैं, तो आदमी कभी-कभी लाइफ में रिस्क लेता है तो जरूर उसको गेन होता है। आपका नाम...
Mahendra Agarwal