"मेरा नाम जसबीर बख्शी है और मेरी उम्र 64 साल है। वैसे तो हमारी लाइफ में रोज एक नया अध्याय लेकर आती है। हर दिन एक नया चैलेंज होता है। पर फिर भी मैं अपनी जनरेशन को अपने बच्चों को अपने बचपन का एक कड़वा सच बताना चाहती हूँ। बात उस समय की है जब मैं आठवीं क्लास में पढ़ती थी। मेरे पापा एक बिजनेसमैन थे। उस समय उनको एक लंबी बीमारी हो गई जिससे उनका पूरा बिज़नेस लॉस में चला गया क्योंकि घर में वो अकेले अर्निंग मेंबर थे। उनकी बीमारी से घर की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हो गई थी।
पर हमारी मदर ने उस समय हमें सब भाई-बहनों को एक बात बिठाकर समझाई कि काम कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता, हमें भीख नहीं मांगनी, अनुचित तरीके से पैसा नहीं कमाना। बस मेहनत करनी है, पढ़ना नहीं छोड़ना, हिम्मत नहीं हारनी। मिलजुलकर सब काम करना है। घर में चाहे कुछ भी ना बने, घर में अंगीठी जरूर जलानी है ताकि अड़ोस-पड़ोस को यह ना पता चले कि हम लोग भूखे सोए हैं। और किस कोई भी हमारी मजबूरी का फायदा ना उठा पाए।
फिर हम सबने मिलकर बहुत सारे छोटे-छोटे काम जैसे फूल माला बनाना, गेहूं साफ करना, लोगों के बर्तन साफ करना, कपड़े धोना, बहुत सारे काम छोटे करते थे और अपने-अपने टाइम से पढ़ाई करते थे और पूरे परिवार ने एकजुट होकर उस जो आर्थिक जो हमारी स्थिति कमजोर थी, उसको वापस खड़ा करने के लिए बहुत मेहनत की। और अपनी पढ़ाई करके हम अच्छी-अच्छी जॉब भी हमने बाद में ली।
तो हम अपने बच्चों को यह समझाना चाहते हैं कि समय कभी भी खराब हो सकता है। उस समय एकजुट होकर रहना चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए। कोई गलत रास्ता या कोई गलत तरीके से पैसा नहीं कमाना चाहिए और परिवार में हमेशा सहयोग बनाकर चलना चाहिए। धन्यवाद।"