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कठिन समय में संयुक्त परिवार का संबल

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Category: Failure & Resilience

Lesson: यदि पूरा परिवार एक साथ मिलकर संकट का सामना करे, तो बड़े से बड़ा कठिन समय भी आसान हो जाता है।

Why it matters: यदि पूरा परिवार एक साथ मिलकर संकट का सामना करे, तो बड़े से बड़ा कठिन समय भी आसान हो जाता है।


यह आज से 24 इयर्स पहले की बात है 2002 जुलाई। जब तुम्हारी मम्मी शी वास ओनली 17। तो वी वर वैरी एक्साइटेड उसको मेडिकल कॉलेज शुरू करना था वी वर ऑल प्लानिंग टू कम टू दिल्ली। लेकिन सडनली सैटरडे दैट वास आई थिंक नाइंथ ऑफ जुलाई। एटींथ जुलाई को चीकू मामा वास बोर्न और किरण नानी वास in the hospital एंड शी केम HOME ऑन नाइंथ। और प्रिया जो थी शी वेंट टू द जिम in बेकर्सफील्ड क्लोज टू आवर हाउस in सेवनओक्स कंट्री क्लब। वो जिम में गई थी एक्सरसाइज करने और वापस आ रही थी शी वास ऑन ए स्कूटी। राइट व्हेन शी वास कमिंग बैक in front of the house सडनली एट ए टर्न शी फेल डाउन एंड लॉस्ट her balance। और ऐसे ही गिरी की उसका एंकल दब गया और एंकल ब्रोक। शी वास क्राइंग वहां पे सुरक्षा जो थी वो पेट्रोल कर रहे थे तो शी टोल्ड him दैट माय house इस राइट there in front please call someबॉडी। तो सुरक्षा वाला आया उसने कॉल बेल बजाई और बताया वी ऑल रैन नंगे पैर हम भागे एकदम से। तो इसको तो उठा भी नहीं सकते थे क्योंकि बहुत पैर में चोट लगी हुई थी यह डर था कि कहीं कैसे होगा। तो विनोद नानाजी वास HOME इट वास सैटरडे लकीली रमेश नानाजी वास HOME। विनोद नानाजी ने जल्दी से एक शॉर्ट्स पहनी हुई थी और कार स्टार्ट करी फटाफट टी शर्ट पहनी जल्दी से और किसी तरह से हमने इसको उठा करके मेरे पास मैंने सिर्फ स्लीपर पहनी और भाग ली बाल भी बने हुए नहीं थे बट समहाउ वी managed टू put her in the car। मैंने इसके पैर को किसी तरह से होल्ड किया और दोनों नानाजी विनोद हम इतने घबराए हुए थे विनोद नानाजी ने कार स्टार्ट की और हम भागे hospital की तरफ फटाफट से। वी वेंट टू मेमोरियल hospital। सैटरडे था सैटरडे संडे इस NOT ए गुड डे फॉर एनी मेडिकल ट्रीटमेंट स्पेशली कोई ऐसा एक्सीडेंट हुआ हो जिसमें सर्जरी की उम्मीद हो या क्या होना है कुछ पता नहीं था वी वर वैरी स्केयर्ड। Hospital पहुंचे वहां पे डॉक्टर चंद्रा ऑर्थोपेडिक सर्जन थे उनको बुलाया ही केम। मम्मी वास क्राइंग लाइक एनीथिंग आई वास क्राइंग लाइक एनीथिंग। वाई और उन्होंने थोड़ा स्टेबल किया पैर को बट ही सेस एक्सरे किया उन्होंने कहा कि काफी ज्यादा अंदर हड्डी टूट गई हैं इट्स NOT जस्ट वन crack। काफी पीसेज हो गए हैं तो शी needs ए सर्जरी एंड इट्स ए मेजर सर्जरी एंड वी कैन डू इट here। तो हमने मतलब वो कर सकते थे बट फिर भी नानाजी ने पूछा भाई हु इस द बेस्ट सर्जन अराउंड वी कैन गो anywhere बट वी want टू make श्योर कि बेस्ट सर्जन ही इसको करें। उन्होंने बताया कि सैन फर्नांडो वैली में आई forgot the name ऑफ द डॉक्टर मम्मी probably remembers वो हैं ही इस एन expert। उनके केसेस एकदम परफेक्ट होते हैं क्योंकि हमें बहुत चिंता थी कि देखो इसके पैर में कहीं कोई लिम्प ना रह जाए कहीं लेग शॉर्ट ना हो जाए। तो उस रात तो बेकर्सफील्ड ही रहना था इट happened in the afternoon हम लोग मेमोरियल hospital में ही रुके। वहीं सारी रात बैठे रहे और अर्ली मॉर्निंग एम्बुलेंस लेके हम सैन फर्नांडो वैली के लिए निकले मैं, रमेश नानाजी, आशीष और प्रिया। अब यह चिंता की संडे है वो सर्जन संडे को कहां से मिलेगा 99% तो होते ही नहीं होंगे तो सर्जरी नहीं करेंगे वो कहेंगे और एक दिन के बाद एंड द मोर delay happens चांसेस बढ़ जाते हैं कि भी ठीक नहीं होगा सर्जरी तो इमीडिएट करनी है। किसी तरीके से हम वहां राम-राम करते-करते पूरे रास्ते में हनुमान चालीसा पढ़ते-पढ़ते प्रार्थना करते-करते जा रही थी कि भगवान बस वही सर्जन मिल जाए आज भगवान उसको बुला देना किसी तरह से और देखो जब हम वहां पहुंचे इसको इमरजेंसी रूम में फटाफट से एडमिट किया और उसके बाद पता लगा कि दैट सर्जन इस there in the hospital एंड ही इस working। इतना भगवान को धन्यवाद किया कि भगवान आप बहुत सुनते हैं हमारी बहुत प्यार करते हैं आप। तो उसके बाद इसको एडमिट करके उन्होंने उसी दिन इसकी सर्जरी की। और सर्जरी वास सफल काफी देर लगी उसमें बट इसको रॉड भी डली स्क्रूज भी डले और काफी बड़ा सब एक एक्सीडेंट हो गया एक छोटे से बात में पता नहीं क्या हुआ। तो वहीं पर रुके हम लोग फिर कई दिन वहां रहे उसके बाद धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके बेकर्सफील्ड आए वापस। तो ऑलमोस्ट थ्री टू फोर वीक्स तक तो पैर को सीधे ही रखना था बिल्कुल प्लास्टर में था। बड़ा मुश्किल था यह भी बेचारी बहुत रोती थी और हम भी बड़े परेशान थे लेकिन what आई am trying टू tell इस कि पूरे परिवार का इतना सपोर्ट था हम जॉइंट family में थे घर में इतने सारे लोग थे और देखो चीकू हुआ था पैदा बहुत दिन के बाद घर में खुशी आई थी सडनली ऐसा हो गया। तो किरण नानी ने भी बिल्कुल चिंता नहीं की कि भाई शी इस शी has delivered ए baby वो भी भागी भागी की नहीं मैं करती हूं मैं करती हूं तो हम मैं फिर उनको बोलती थी नहीं तुम्हारी जरूरत नहीं है मैं हूं अम्मा बाबा जी भी गए हुए थे वहां पे। तो पूरा परिवार था और इतनी सपोर्ट मिली इतना सब साथ देते थे इसके साथ भी इसका भी मन लगाना यह बेचारी बेड पे सारा दिन लेटी हुई इसका मन कैसे लगाएं अमोल खेलता था आशीष बैठता था फिर मुनमुन थी गोलू था। बहुत मुश्किल टाइम था लेकिन परिवार का सपोर्ट इतना था परिवार का सहारा बहुत था। जिस तरह से सारे परिवार ने मिलकर संभाला वो टाइम आज भी याद करती हूं तब मन भर आता है। काफी टाइम लगा। उसके बाद कई बार हम डॉक्टर को जितनी जब भी वो बुलाते थे हम जाते थे उन्होंने फिर एक्सरे किया फिर प्लास्टर खोलने का टाइम आया। फिर वो प्लास्टर खोला उसके बाद physical therapy कितनी मुश्किल होती थी। इसको कितना दर्द होता था शी used टू just लेकिन बहुत बहुत मुश्किल होता था बट वी had टू go through that। धीरे-धीरे करके इसका therapy कर-करके कर-करके कर-करके धीरे-धीरे धीरे-धीरे खुला पैर। अभी चिंता बहुत थी कि भी क्या यह ठीक से वॉक कर पाएगी क्या पहले के जैसे हो पाएगी इसकी वॉक। फिर इधर रोहतक में इसका एडमिशन था एमबीबीएस में इसको शुरू करना था वहां हम लेट होते जा रहे थे start इट वास supposed टू भी हमें तो जुलाई एंड में जाना था वहां अब हमें सितंबर हो गया। सितंबर में फिर मैं इसको लेकर के रोहतक आई। हाथ में स्टिक लेके यह चली तब भी एक ब्रेस बांधती थी पैर में। पर धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके सब कुछ ठीक हो गया। तो भगवान की कृपा तो है ही इसमें लेकिन सबसे ज्यादा परिवार का साथ जो है वो मुश्किल टाइम में तुम्हारे मुश्किल टाइम को इतना मुश्किल नहीं रहने देता आसान बना देता है। तो मैं तो यही कहूंगी बेटा कि जीवन में कुछ भी हो जाए परिवार का साथ हमेशा देना। परिवार को साथ परिवार के साथ हमेशा रहना भाई बहनों के साथ में रहना अपने पूरी family को उसके लिए खूब करो और तुम करते हो तो करा हुआ बेकार नहीं जाता तुम्हें भी खूब मिलता है। तो साथ रहने का एक अलग ही मजा होता है सुख में दुख में सारा टाइम बहुत मजे से निकलता है। तो एक ऐसा incident था ऐसे बहुत चीजें हुई जीवन में पर यह बहुत major incident था। 24 साल हो गए इस बात को लेकिन आज जब तूने मुझसे कहा कि नानी कोई ऐसी याद करो कोई चीज जो आप हमें बता सकते हो तो मुझे पता नहीं अचानक से वो एकदम से याद आ गया। तो मैं इतना ही कहूंगी तेरे को शिवांश को वेदांशी को सभी को की परिवार इस दी blessing भगवान की दी हुई एक blessing है उसको बहुत प्यार करो बहुत संभाल के रखो। कभी भी टूटने मत दो। ओके।
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Geeta Gupta

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