परिवार का महत्व और बड़ी अम्मा का स्नेह
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Category:
Relationships
Lesson:
संकट के समय परिवार ही इंसान का सबसे बड़ा सहारा और ताकत होता है।
Why it matters:
संकट के समय परिवार ही इंसान का सबसे बड़ा सहारा और ताकत होता है।
यह बात है 1988 की। उस समय मैं अचानक से बहुत बीमार हो गई। और कुछ भी पता नहीं लग रहा था कि क्या बीमारी है। मैं नानी। अच्छा ओ हो। तो नानाजी ने बहुत सारी टेस्टिंग करवाई एंड दैट वास द ईयर जब नानाजी ने अपनी मेडिकल प्रैक्टिस शुरू ही की थी अक्टूबर 1988। और आई गॉट सिक आफ्टर दैट उसी साल में। इतनी बीमार हो गई बहुत बुखार आता था। ती सर्दी लगती थी समर का टाइम लेकिन रजाई ओढ़ रहे हैं और शिवरिंग हो रही है। तो देन धीरे-धीरे बहुत सारी टेस्टिंग हो रही थी आशीष और प्रिया दोनों बहुत छोटे-छोटे थे। आशीष वास ओनली टू इयर्स ओल्ड एंड प्रिया वास थ्री एंड हाफ। तो फिर भारत में किसी को पता नहीं था बट देन समहाउ दे न्यू दे केम टू नो कि भई मैं बीमार हूं मुझे बुखार चल रहा है एक महीना हो गया दो महीना हो गया एंड वी आर NOT एबल टू फाइंड दी डायग्नोसिस। तो जो बड़ी अम्मा जी हैं उनको जब पता लगा तो बस वो फौरन समालखा से दिल्ली आईं। और उन्होंने अशोक भैया को बोला आज ही मेरे टिकट कराओ। मुझे फौरन जाना है गीता बीमार है छोटे-छोटे बच्चे हैं एंड देयर इस नोबडी टू टेक केयर ऑफ देम। और धर्मेश को बिल्कुल बताना मत नहीं तो वो मना कर देगा। नानाजी ना बड़े नानाजी नानाजी जो हैं उनको अगर तुमने बता दिया कि मैं आ रही हूं तो वो मना कर देगा कि अम्मा जरूरत नहीं है आने की। लेकिन नहीं मुझे जाना है जरूर। तो अशोक भैया ने उनकी टिकट कराई उनको प्लेन में बिठाया और उसके बाद फोन किया अमेरिका कि माई इस कमिंग बाय दिस फ्लाइट। और जब मां आई तब आई वास इन लॉस एंजेलिस in the hospital। और दोनों प्रिया और आशीष नानाजी के एक friend थे डॉक्टर चावला उनके घर पर थे। तो जब अम्मा पहुंची शी टूक केयर ऑफ ऑल ऑफ अस। बच्चों को भी इतना आराम हो गया आशीष प्रिया सब उनके साथ सारा दिन लगे रहते थे। एंड आई वास स्टिल आई इट टूक सम मोर टाइम फॉर मी टू रिकवर। लेकिन अम्मा ने बहुत काम किया तब आके सारा घर का काम, बच्चों को संभालना, मुझे संभालना नानाजी वास वैरी बिजी in the practice बिकॉज़ दैट वास द फर्स्ट ईयर ऑफ हिस practice। बट उसके बाद भी उनको कितना भागदौड़ करनी पड़ती थी कभी मुझे hospital ले जाना कभी डॉक्टर के ले जाना कभी यह दवाई कभी वह दवाई। तो हमारी जो परिवार है जो family है उसकी importance ऐसे टाइम पर पता लगती है व्हेन यू व्हेन यू आर in some problem। तो आई स्टिल रिमेंबर दोस डेज की गरम-गरम खाना बनाकर मुझे खिलाती थी वो। पूरा टाइम आशीष रात को कई बार रोने लगता था उसको अपने घर चिपका के बिठा बैठी रहती थी कि आशीष मम्मी ठीक हो जाएगी। ना। तो इट वास ए इट इज ए मेमोरेबल thing एंड इट्स ए learning thing फॉर मी कि परिवार में एक दूसरे के लिए हमको कैसे काम करना चाहिए यह अम्मा ने हमेशा हमेशा करके दिखाया।
Geeta Gupta