"यह कहानी मेरे बड़े बेटे से संबंधित है। उसने सीए 22 साल में पास किया। उसको जॉब नहीं करनी थी और हम लोग का टाइम बहुत मुश्किल चल रहा था उस समय, उसको बिजनेस ही करना था। एनीहाउ हम लोग को लगता था कि वह कुछ काम करे लेकिन वह कुछ वह एकदम नहीं सुन रहा था और अपने काम में लगा हुआ था।
धीरे-धीरे टाइम बीतते जा रहा था और सबके दिमाग में यह हो गया कि यह क्या करेगा? यह क्या करेगा? यह कुछ नहीं कर पाएगा। ऐसे टाइम वेस्ट कर रहा है अपना। लेकिन उसने एक कान से सुना और दूसरे कान से निकाल दिया। जब मैंने उससे कहा कि तुमको बुरा नहीं लगता है? यह सब बातें सुनने से तुम परेशान नहीं होते हो? तो वो बोला, 'मम्मी, मुझे अपने लक्ष्य पर ध्यान देना है। मुझे लोगों की बातें नहीं सुननी। मैं अपने लक्ष्य पर ही काम करूँगा।'
धीरे-धीरे उसको सफलता मिलने लगी। उसको वो अपने काम पर लगा हुआ था। हम लोग भी अपना पेशेंस लूज़ हो रहा था हमारा भी, कि कैसे काम होगा, कैसे शादी होगी, कैसे क्या होगा, लेकिन कुछ समझ में नहीं आ रहा था। करते-करते मैं भी हताश हो गई थी। पर फिर उसके बाद मेरा छोटे बेटे ने मुझे समझाया, 'मम्मी, जैसे बनयान का पेड़ धीरे-धीरे अपनी शाखा नीचे की ओर फैलाता है और फिर एकदम से बड़ा हो जाता है, वैसे ही भैया एक दिन कुछ करके निकलेगा, देखना एक दिन वो कुछ बनेगा।'
पर मुझे विश्वास नहीं होता था। फिर जब धीरे-धीरे वो बढ़ने लग गया और उसका रिजल्ट आने लग गया, तब मुझे लगा कि नहीं, इसका लक्ष्य सही है और यह कुछ ना कुछ करके दिखाएगा। आज मैं बहुत खुश हूँ उसके इस काम से, वो एक बहुत अच्छा इंसान बन गया है और बहुत ऊँचे ऊँचे स्थान पर है। हम लोग बहुत, मेरी फैमिली और हम लोग बहुत खुश हैं उसके लिए।
हो गया? मो... हां। इस स्टोरी से हमें पता चलता है कि हमें हार नहीं माननी चाहिए और हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए।"