"मैं कामिनी सांगवी, बचपन से ही काफी बोल्ड एंड कॉन्फिडेंट थी। किसी से डरती नहीं थी और बहुत ही हिम्मत वाली थी। जीवन में समय-समय पर बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अकेलेपन का एहसास कई बार ऐसा लगा जैसे कि अब मैं टूट जाऊंगी। मैंने हमेशा भगवान को ही अपना बेस्ट फ्रेंड माना है। अपने दिल की बात सिर्फ भगवान से ही शेयर करती हूँ।
बस बस एक ही विश्वास हमेशा मन में रहता था कि गॉड कैन नेवर गो रॉन्ग। बस सब भाई-बहन जब छोटे थे, हम सब जब भाई-बहन जब छोटे थे, तो घर की छत पर सोते थे। गर्मी के दिन थे, हम गीली चादर सर से पैर तक ढककर सोते थे। अचानक एक दिन मुझे लगा कोई छत पर चल रहा है। चुपके से कोने से झांक कर देखा तो लगा कि कोई चोर है और घर में घुसने की कोशिश कर रहा है। मैंने कुछ नहीं सोचा और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाकर 'चोर-चोर' करके उसके पीछे भागी। उसको पकड़ने के लिए मेरी आवाज़ सुनकर घर के सब लोग उठ गए। उसे पकड़ने के लिए भागे-भागे, उसका हाथ मेरे हाथ में आ गया और वह हाथ छुड़ाकर भागने लगा। नीचे कुछ छत से कूद गया। कूदने से उसकी टांग टूट गई और वह पकड़ा गया। उस समय भगवान ने मुझे कहा कहाँ से हिम्मत और ताकत दी कि मैं उस चोर को पकड़ सकी। ऐसे जीवन में कोई भी हालात आए, अपनी हिम्मत और ताकत को जोड़कर उसका सामना करें, तो सदा हमारी ही जीत होगी। परिस्थितियों से डरें नहीं, बल्कि उसका डटकर सामना करें I"