"मैं अरुण कुमार गुप्ता
रिटायर्ड गवर्नमेंट सर्विसेज
मेरा एक्सपीरियंस यही है
कि पहली सोच तो यही है कि
भगवान जो करता है अच्छे के लिए करता है
मैं सारा कुछ इसी के ऊपर डिपेंड होकर आगे मैं अपना जीवन व्यतीत किया है
बच्चों को मैंने अच्छे से अच्छी
इंग्लिश स्कूल में
शिक्षा प्रदान करी
बड़े हुए तो उनको जो है अब उनको इंजीनियरिंग करनी थी कॉलेज में
इतनी तो तनख्वाह नहीं थी फिर भी
बच्चा अच्छा नंबर मार्क्स लेकर आया लेकिन
वह मेडिकल में जा सकता था
लेकिन उसको
उसके पास को वह कहता कि मैंने बायो ही करनी है बायोटेक
अब यहां दिल्ली में कोई बायो का स्कोप नहीं था उस टाइम में
दिल्ली से बाहर ही था
फिर भी
यहां पर एक
मेला लगता था प्रगति मैदान में सब प्राइवेट कॉलेजेस का
तो चांस की बात है कि
बेटे को जो है
मैनेजमेंट सीट जो है मिल गई
अब
उन्होंने ऑफर कर दी क्योंकि बच्चे के मार्क्स जितने थे
कि उनको जो है अपनी कोटा दे दिया अब हमारा स्ट्रगल था उनके बच्चे को पढ़ाना है पेमेंट
6-7 लाख का खर्चा किया था
अब फिर वही हम बैकग्राउंड में आ गए कैसे होगा
पता नहीं भगवान ने अपने आप ही स्कोप दे दिया
कहीं से
मेरे को मांगने की जरूरत नहीं पड़ी और बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिल गई
और आज वो जो है
अपने पैरों पर खड़ा है
और यही सबसे बड़ी अचीवमेंट है
थैंक यू"