"""हेलो, राम-राम!
मेरा नाम श्यामा अग्रवाल। मैं बीकानेर से और महाराष्ट्र का ससुराल है। और मेरे परिवार में जो बहुत अच्छे-अच्छे किस्से हुए, उससे मैं बहुत ज्यादा मजबूत हुई। मेरी जब शादी हुई थी, तो मेरे पीहर और ससुराल दोनों एकदम सॉलिड थे। बाद में जब भाइयों में बंटवारा हुआ, तो मुझे बहुत अच्छे-अच्छे चांस मिले। मेरी मम्मी ने शिक्षा दी... मेरी मम्मी के पास बहुत सारे पैसे रहने के बाद भी, वो मेरी न हेल्प करके, मुझे हिम्मत बहुत दी। और उसने कहा—'हिम्मत कभी नहीं हारना।' और मैंने पांच-पांच साल तक न्यू बिजनेस और अच्छा एक्सपीरियंस... उसमें हमारे ससुराल में बहुत अच्छे फर्म थे, जैसे अग्रवाल राइस मिल, अग्रवाल हार्डवेयर, अग्रवाल ट्रांसपोर्ट... यह सब रहने के बावजूद भी हमारे मिस्टर थोड़े भोले और शांत होने की वजह से उन्होंने... दूसरे गांव गए हुए थे वो, जब पीछे से उन्होंने मराठी के पेपर भेजे थे मेरे पास और मैंने साइन की थी। और हमारे थोड़ा सा उतार-चढ़ाव आया।
उसके बाद मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। और मेरी मम्मी से मुझे प्रेरणा मिलती रही। उसके बाद मैंने पांच-पांच साल तक बिजनेस किया। उसमें सबसे अच्छा घूंघट में रहने के बावजूद मैंने घर में 'लेडीज कॉर्नर' खोला, जो गांव बहुत छोटा था। और उसमें अग्रवाल और फ्रेंड्स सब बहुत अच्छे थे, उन्होंने भी मेरा साथ दिया। और मैं भगवान को भी दिन-रात कंटिन्यू याद करती रही। और मेरी मेहनत काफी रंग लाई।
मेरे बच्चे को मैंने फिफ्थ स्टैंडर्ड से लड़के को दूसरे शहर भेज के पढ़ाया और उसने भी बहुत मेहनत की। आज... फिर उसके बाद हम नांदेड़ गए, स्वीट मार्ट डाले, उसके बाद एजेंसी लाइन खोली। और सब जगह मैंने बहुत मेहनत की और बच्चों को बहुत अच्छा पढ़ाया। मैं बच्चों को यह प्रेरणा देना चाहती हूं कि आप लोग भी बहुत अच्छा मेहनत करोगे तो आपको लाइफ में कभी भी कमजोरी या कभी हार महसूस नहीं होगी।
और मैं अंत में यही बोलना चाहती हूं कि कभी भी हिम्मत न हारें, छोटे से ही बड़े होते हैं। और मेरी बेटी इंग्लिश मीडियम से है, जो ससुराल में राजस्थान में जा के और अपने तीनों बच्चों को बहुत अच्छा पढ़ा रही है। उसमें दो जेठ के बच्चे हैं, एक खुद का है, तीनों इंग्लिश मीडियम से पढ़ते हैं। मेरी बेटी ने जो इंग्लिश मीडियम मैंने पढ़ाया था, वो आज काम में आ रही है और मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, बहुत खुशी हो रही है। थैंक यू, राम-राम!"""