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संघर्ष और कर्तव्यों की विजय

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Category: Failure & Resilience

Lesson: कठिन से कठिन समय में भी जब आप अपने परिवार और कर्तव्यों का साथ नहीं छोड़ते, तो मेहनत और सहनशीलता से बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।

Why it matters: कठिन से कठिन समय में भी जब आप अपने परिवार और कर्तव्यों का साथ नहीं छोड़ते, तो मेहनत और सहनशीलता से बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।


मेरा नाम सुषमा भतिया है। मैं आपको एक ऐसी स्टो- कहानी बताती हूँ कि आप सुन के हैरान होएंगे। 85 में मेरे मिस्टर की डेथ हुई, प्रोफेसर थे। मेरी दो बेटियाँ थीं, सास-ससुर भी साथ में थे। मेरे पापा जब आए वहाँ उ- डेथ पे, तो मुझे बोलते थे कि आप अ- अभी यहाँ छोड़ दो और बेटियों को लेके वहाँ जयपुर चलो। मैंने बोला, 'पापा एक...' उ- सास-ससुर को भी लेके चलो। मैंने बोला, 'पापा एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकतीं। मैं अपने बच्चों को और सास-ससुर को छोड़ के नहीं जाऊँगी, मैं यही रहूँगी, यहीं पढ़े...' उन्होंने मेरे साथ 8 साल तक बात भी नहीं की। तो भी मैंने सहन किया और बच्चों को बड़ा किया और खुद में कमाकर उनको खड़ा किया। आज मेरी बच्ची एक फैक्ट्री की... हेड बन गई है, मैं बताती हूँ आपको। ससू- दोनों बेटियों को फॉल लगा-लगा के, कपड़े बेच के, ट्यूशन दे के, सर्वोदय स्कूल में पढ़ा के बड़ा किया।"
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Sushma M. Bhatia

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